अधूरे अलफ़ाज़ शायरी, शायरी का वह रूप है जो किसी भी व्यक्ति की भावनाओ को व्यक्त करने के लिए अधूरे शब्दों का प्रयोग करता है। अधूरे अलफ़ाज़ में अपनी सारे बाते कह देना एक तरह की कला है। जो आज के समय में बहुत पसंद भी की जाती है। अधूरे अलफ़ाज़ शायरी में सभी प्रकार की शायरी शामिल होती है जैसे प्यार से लेकर टूटे हुए दिल तक, लाइफ शायरी आदि। यदि आप भी किसी को अपनी भावना अधूरे अलफ़ाज़ शायरी में बया करना चाहते है तो ये लेख आपके लिए है। क्योकि आज के इस लेख Alfaaz Shayari In Hindi में आपको का एक बेहतरीन Collection मिलेगा। जिसे पढ़कर आपका मन मंत्रमुग्द हो जाएगा। इतना ही नहीं यहाँ से आप Alfaaz Shayari In Hindi की Images भी डाउनलोड कर सकते है और किसी भी Social Media Platform जैसे Facebook, Instagram ,WhatsApp पर पोस्ट कर सकते है।

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Alfaaz Shayari In Hindi

दोस्त बेशक एक हो लेकिन ऐसा हो, जो अल्फाज से ज्यादा खामोशी को समझें।

एक उम्र कटी दो अलफ़ाज़ में, एक आस में, एक काश में।

तुम्हे सोचा तो हर सोच से खुशबू आई, तुम्हे लिखा तो हर अलफ़ाज़ महकता पाया।

ये जो खामोश से अलफ़ाज़ लिखे है न, पढ़ना कभी ध्यान से चीखते कमाल है।

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मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैंने कि क्यूँ दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हालात समझता हूँ।

तीन चीज़ें कभी वापस नहीं आती, बोले गए अलफ़ाज़ गुज़रा हुआ वक़्त टूटा हुआ भरोसा।

लफ्ज़… अलफ़ाज़… कागज़ या किताब… कहाँ कहाँ रक्खें हम… यादों का हिसाब…..

इज़हार-ए-इश्क़ की खातिर कई अलफ़ाज़ सोचे थे, खुद ही को भूल बैठे हैं हम, जब तुम सामने आये!!

हम तो बहुत खास थे ये उनके “अलफ़ाज़ थे”.

रुतबा तो खामोशियों का होता है मेरे दोस्त, अलफ़ाज़ तो बदल जाते है लोगों को देखकर।

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सिमट गई मेरी गजल भी चंद अलफ़ाजो में, जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं।

कैसे बयां करूं अल्फाज नहीं है, दर्द का मेरे तुझे एहसास नहीं है, पूछते हो मुझसे क्या दर्द है, मुझे दर्द ये ही कि तू मेरे पास नहीं है।

सारी रात तेरे यादों में खत लिखते रहे, पर दर्द ही इतना था की, अश्क बहते रहे और अल्फाज बहते रहे।

बिखरे पड़े हैं दर्द कई तू समेट कर इन्हे अल्फाज़ करदे, जोड़ दे बिखरे पन्ने को मेरी जिंदगी को तू किताब कर दे।

Adhoore Alfaaz Shayari

हम अल्फाजो से खेलते रह गए, और वो दिल से खेल के चली गयी।

अब ये न पूछना के मैं अलफ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ, कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के कुछ अपनी सुनाता हूँ।

तुम जा तो चुकी हो मेरी दुनिया से, लेकिन मेरे अल्फाजों में जिंदा आज भी।

अल्फ़ाज़ न आवाज़ न हमराज़ न दम-साज़, ये कैसे दोराहे पे मैं ख़ामोश खड़ी हूँ।

उनके अल्फाज हमारे कानों तक पहुंच तो जाएंगे, हम तो सिर्फ दोस्त हैं उनके, पर वो अपना दर्द हमें इस कदर सुनाते हैं, जैसे कोई खास है उनके।

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तेरी बातो मे निकलते अल्फाज, युही नही समझ लेते है हम, उस को क्या पता प्यार करते है हम, जिनसे उनकी खामोशी भी समझ लेते है हम।

डाल दो अपनी दुआ के, चंद अल्फाज मेरी झोली में, क्या पता आपके लब हीले, और मेरी जिंदगी बदल जाए।

तेरी याद तेरी चाहत शायरी के अल्फाज बन गए, भरी महफिल में लोग मेरे दर्द को भी वाह वाह कह गए।

क्या लिखूं और कितना लिखूं, दिल के एहसासों को, ज़िन्दगी भरी पड़ी है सब, अनकहे अल्फाजों से.।।

वक्त बदला है, हक़ीक़त नही, अल्फाज़ हैं नए, मै हूं वही।

लिखा करूंगा मै ज़िन्दगी भर अपनी कही अनकही बातों को, पर क्या तुम समझ पाओगे उन अल्फाजों को.?

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शायर है हम शराबी नहीं, जब तक चाय नहीं पीते, अल्फाज पन्नों पर नहीं बरसते।

आ लिख दूँ कुछ तेरे बारे में, मुझे पता है कि तू रोज ढूंढती है, खुद को मेरे अल्फाजो में।

न अहसास बचे हैं, न अल्फ़ाज़ बचे हैं, खो गयी है मुस्कान, बस राज़ बचे हैं।

Best Alfaaz Shayari Collection

मत लगाओ बोली अपने अल्फ़ाज़ों की, हमने लिखना शुरू किया तो तुम नीलाम हो जाओगे

बिछड़ के तुझसे किसी दूसरे पर मरना है, ये तजुर्बा भी इसी जिन्दगी में करना है।

आँसू मेरे देख के क्यों परेसान है ए दोस्त, ये तो वो अलफ़ाज़ है जो जुबां तक ना आ सके।

न चाकू, न खंजर, न तलवार कर सकेंगे, रकीब के दिल में घाव मेरे लिखे अल्फाज़ करेंगे।

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एक दूरी बनाए रखनी थी सबसे नजदीकियां निभाते हुए।

कुछ एहसास कुछ जज़्बात कुछ बिखरे अल्फ़ाज़ लिखता हूं, जो खो गया है तुम में, मुझ में कहीं मै वो खोए हुए अल्फाज़ लिखता हूं।

कुछ बातें यूं दिल में रह गईं, जो अल्फाज़ बयां ना कर पाए, वो बहती आंखें कह गई।

मेरे कड़वे अल्फाज़ चुभ गए उनको, मगर मेरा साफ दिल नही नजर आया।

अल्फाजों में जो हम बयां करना छोड़ दिए, खामोशियों को तो जैसे वो समझना ही छोड़ दिए।

महसूस करोगे तो गोरे कागज पर भी नजर आएंगे, हम अल्फाज़ हैं, तेरे हर लफ्ज़ में ढल जायेंगे…

चलो मान लिया, यूं तो मेरी तकदीर के वो नुक्ते हैं…. मसला इन अल्फाजों का नही, वो मेरी हां पर अड़े हैं।

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कुछ एहसास खामोश अल्फाजों की तरह होते हैं, जो बस यूं ही सुलगते और बुझते रहते हैं.!!

इजहार ए इश्क तुम ही करो तो बेहतर होगा…… तुम्हें देखकर मेरे अल्फाज़ लड़खड़ाने लगते हैं…..

ना खुशी खरीद पाता हूं ना गम बेच पाता हूं, फिर भी मै ना जाने क्यों हर रोज़ कमाने जाता हूं।

फ़ुरसत में भी फ़ुरसत ना मिली उन्हें…, हम उनके लिए इतने फिजूल थे।

Alfaaz Shayari / Captions / Messages

बहुत रोया होगा वो शख़्स मुझसे बिछड़ कर, मैंने जाते वक़्त उसे मुड़कर नही देखा..!!

तुम ना मानो मगर हक़ीक़त है, इश्क़ इंसान की जरूरत है।

ढूंढ़ लेना ख़ुद को मेरे अल्फाजों में, सरेआम नाम लिखा तो आम हो जाओगे।

उनके आने से आ जाती है मेरे चेहरे पे रौनक, और वो समझते हैं कि मेरा हाल अच्छा है…

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अलफ़ाज़ चुराने की हमें जरुरत ही ना पड़ी कभी, तेरे वे हिसाब ख्यालों ने वे हतासा लफ्ज दिए।

हर रात जान बूझकर रखता हूँ दरवाज़ा खुला… शायद कोई लुटेरा मेरा गम भी लूट ले…

अल्फ़ाज़ उतने झूठ न कह सके आज तक, जितने सच आंखें एक नज़र भर में कह गयीं।

एक साथ चार कंधे देखकर जहन में आया, एक ही काफी था गर जीते जी मिला होता।

ये बारिश जो यूं उमड़ पड़ी है, लगता है तुम शहर में हो.।

मेरे दिल से हो या तेरे दिल से हो, प्यार के अल्फ़ाज़ निकलने चाहिए।

बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का कारोबार, मुनाफा कम है, पर गुज़ारा हो ही जाता है…

अगर आप अजनबी थे तो लगे क्यों नहीं, और अगर मेरे थे तो मुझे मिले क्यों नहीं..

मैंने नजदीकियों में खलिश देखी है, मैंने दूरियों में पनपता इश्क़ देखा है।

ना अल्फाज झूठे होते है, ना शब्दो के अंदाज झूठे होते है, लिख हुई हर बात में, कुछ सच्चे जज्बात छुपे होते है।

लिखे हुए अल्फाज तो सभी पढ़ते है साहब, कोई खामोशी समझने वाला भी चाहिए।

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मुकम्मल ना सही अधूरा ही रहने दो, ये इश्क़ है कोई मक़सद तो नहीं है। ,

जो संजीदगी से कहना था वो तो हम कह चुके शरारत में।

तुझे भूल जाना तो मुमकिन नहीं है, मगर भूल जाने को जी चाहता है।

जिस तरह मै बिछड़ना चाहता हूं, वो अभी उस तरह मिला भी नहीं।

जैसा दर्द हो वैसा मंज़र होता है, मौसम तो इंसान के अंदर होता है.!

Best Alfaaz Shayari In Hindi

मुझसे गुस्सा करके जब वो थक जाती थी, तो मेरे ही कांधे पे सर रखकर सो जाती थी!

दिल तो था ही नही पास मेरे, ये जो टूटा वो भरोसा था मेरा।

जाते जाते झगड़ा करके उसने बिल्कुल ठीक किया, प्यार जता कर जाती तो हम रोते रोते मर जाते।

माहौल गरम हो या हो बातों में चिंगारी मै मशरूफ हूं अपने काम में, मुझे भाती नही ये दुनिया दारी।

रंग देखने को तब मिलते हैं बड़े नसीब से, जब गुजरना पड़ता है किसी के बेहद करीब से.!

मीठे बोल बोलिए क्योंकि अल्फाजों में जान होती है, इन्हीं से आरती अरदास और अजान होती है, ये दिल के समंदर के वो मोती हैं, जिनसे इंसान की पहचान होती है।

तेरे सिवा कोई मेरे जज़्बात में नहीं, आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं, पाने की कोशिश तुझे बहुत की मगर, तू एक लकीर है जो मेरे हाथ में नहीं।

अगली बार जब तुम मिलो तो हाथ ना मिलाना क्योंकि तुम थाम नही पाओगे और मै छोड़ नही पाऊंगा..

बंद रहते हैं जो अल्फ़ाज़ किताबों में सदा, गर्दिश-ए-वक़्त मिटा देती है पहचान उन की।

वो मेरी आख़िरी मोहब्बत थी मै उसकी पहली गलती था।

कुछ यूँ जमीं से आसमां हो गया बढ़कर दर्द मेरा बेइंतहां हो गया।

उदास ना रहा कर तेरी मुस्कान अच्छी लगती है…. दीदार तो दीदार है तेरी याद भी अच्छी लगती है..!!

मुझे छूकर एक फकीर ने कहा… अजीब “लाश” है, “सांस” भी लेती है…

बहुत भीड़ है मोहब्बत के इस शहर में, एक बार जो बिछड़ा, वापस नही मिलता।

Top Alfaaz Shayari Collection

वो मिली भी तो क्या मिली बन के बेवफा मिली, इतने तो मेरे गुनाह ना थे जितनी मुझे सजा मिली।

इजाज़त तो हमने भी नहीं दी थी मोहब्बत करने की उन्हें, बस वो नज़र उठाते गए और हम तबाह होते गए।

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इश्क़ का सफ़र अब खत्म ही समझिए, उनकी बातों से अब जुदाई की महक आने लगी है।

सांस के साथ अकेला चल रहा था, सांस गई तो सब साथ चल रहे थे।

उड़ने दे इन परिंदों को फिजा में गालिब, जो तेरे अपने होंगे लौट आएंगे किसी दिन।

सब कर लेना लम्हे जाया मत करना गलत जगह पर जज्बे जाया मत करना।वो जो कहता था, कुछ नही होता… हाय मुर्शद…. अब वो रोता है, चुप नही होता।

है इश्क़ तो अब वक़्त जाया ना कर, मान ही लिया है अपना तो पराया ना कर।

एक नजर ने छेड़ा है, अब दर्द-ए-ज़िगर क्या होगा…! जो जख्म बना मरहम से, उस ज़ख्म का मरहम क्या होगा..!!

जानता हूं कि तुझे साथ तो रखते हैं कई, पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई।

काटों पर भी दोष कैसे डालें जनाब पैर तो हमने रखा था वो अपनी जगह पर थे।

लिखता रहूं ता उम्र तुम्हारी खातिर… इतनी कलम में स्याही नही, मै भी इतना काबिल नही, तुम भी इतनी शाही नही…!!

लाख पता बदला, मगर पहुँच ही गया… ये गम भी था कोई डाकिया जिद्दी सा…

हाथ पकड़ कर कोई मुझ पर भी गुमान करे, मेरे रोने पर कोई बच्चों जैसा लाखों सवाल करे!!

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